तिब्बत का क्षेत्रफल कितना है – Tibet ka Kshetrafal Kitna Hai

तिब्बत का क्षेत्रफल कितना है – Tibet ka Kshetrafal Kitna Hai : नमस्कार दोस्तों, आपको स्वागत है हमारे इस Blog पर, जहापर आज हम आपको बताएँगे — “तिब्बत का क्षेत्रफल कितना है – Tibet ka Kshetrafal Kitna Hai “।

तिब्बत प्राचीन भारतीय संस्कृति, धर्म और सभ्यता का एक प्रमुख केंद्र रहा है। तिब्बत प्राचीन काल से ही योगियों और सिद्धों का घर माना जाता रहा है

तथा अपने पर्वतीय सौंदर्य के लिए भी यह प्रसिद्ध है। संसार में सबसे अधिक ऊंचाई पर बसा हुआ प्रदेश तिब्बत ही है। तिब्बत मध्य एशिया का सबसे ऊंचा प्रमुख पठार है। वर्तमान में यह बौद्ध धर्म का प्रमुख केंद्र है।

तिब्बत (Tibet) भारत और चीन के ठीक बीच में एशिया के बीचों-बीच स्थित है। कुछ इसे मध्य एशिया का सुदूर पूर्वी किनारा मानते हैं,

जबकि अन्य इसे पूर्वी एशिया के रूप में वर्गीकृत करते हैं। तिब्बत भौगोलिक दृष्टि से एक शानदार क्षेत्र है,

जो अत्यधिक ऊंचाई वाले पहाड़ों की सीमा से घिरा हुआ है, जो सिंधु, सतलुज, यारलुंग त्सम्पो (जो भारत में ब्रह्मपुत्र बन जाता है), साल्विन, सहित एशिया की कई महान नदियों के लिए स्रोत प्रदान करता है।

आज के Article पर आप जानेंगे — तिब्बत का क्षेत्रफल कितना है – Tibet ka Kshetrafal Kitna Hai.

तिब्बत का क्षेत्रफल कितना है – Tibet ka Kshetrafal Kitna Hai

तिब्बत का क्षेत्रफल कितना है

तिब्बत (Tibet) पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना (PRC) का राष्ट्रीय स्वायत्त क्षेत्र है,

और इसकी भूमि मुख्य रूप से पठारी है। इसे पारंपरिक रूप से बोड या भोट भी कहा जाता है। तिब्बत मध्य एशिया की उच्च पर्वत श्रेंणियों के मध्य कुनलुन एवं हिमालय के मध्य स्थित है।

तिब्बत की कुल क्षेत्रफल 12,28,400 बर्गकिमी (4,74,300 वर्गमील) है। इसकी ऊँचाई 16,000 फुट तक है। तिब्बत का पठार पूर्व में शीकांग से, पशिचम में कश्मीर से दक्षिण में हिमालय पर्वत से तथा उत्तर में कुनलुन पर्वत से घिरा हुआ है।

यह पठार पूर्वी एशिया की बृहत्तर नदियों हवांगहो, मेकांग आदि का उद्गम स्थल है, जो पूर्वी क्षेत्र से निकलती हैं। पूर्वी क्षेत्र में कुछ वर्षा होती है

एवं 1200 फुट की ऊँचाई तक वन पाए जाते है। यहाँ कुछ घाटियाँ 5,000 फुट ऊँची हैं, जहाँ किसान कृषि करते हैं। जलवायु की शुष्कता उत्तर की ओर बढ़ती जाती है

एवं जंगलों के स्थान पर घास के मैदान अधिक पाए जाते है। जनसंख्या का घनत्व धीरे-धीरे कम होता जाता है। कृषि के स्थान पर पशुपालन बढ़ता जाता है।

साइदान घाटी एवें कीकोनीर जनपद पशुपालन के लिये विशेष प्रसिद्ध है।

तिब्बत सदियों से एक स्वतंत्र देश था लेकिन मंगोल राजा कुबलई खान ने युवान राजवंश की स्थापना की और उसने तब तिब्बत, चीन, वियतनाम और कोरिया तक अपने राज्य का परचम लहराया था।

फिर सत्रहवहीं शताब्ती में चीन के चिंग राजवंश के तिब्बत के साथ रिश्ते बने और फिर लगभग 260 वर्ष के बाद चीन की चिंग सेना ने तिब्बत पर अधिकार कर लिया

लेकिन 3 वर्ष के भीतर विदेशी शासन को उखाड़ फेंका और 1912 में तेरवें दलाई लामा ने तिब्बत की स्वतंत्रता की घोषणा की। तब से लेकर 1951 तक तिब्बत एक स्वंत्र देश के रूप में जाना जाता था।

तिब्बत कहा है

तिब्बत भारत के उत्तर में स्थित है जो नेपाल का पड़ोसी देश है। इसकी सीमा भारत और चीन से लगती है। तिब्बत एक पहाड़ी प्रदेश है।

यह समुद्र-तट से सोलह-सत्रह हजार फुट की ऊँचाई पर स्थित है। इसके रास्ते ऊँचे-नीचे और बीहड़ हैं। पहाड़ों के अंतिम सिरों और नदियों के मोड़ पर खतरनाक सुने प्रदेश बसे हुए हैं।

यहाँ मिलोंमील तक कोई आबादी नहीं होती। एक ओर हिमालय की बर्फीली चोटियाँ दिखाई पड़ती हैं,

दूसरी ओर ऊँचे-ऊँचे नंगे पहाड़ खड़े हैं। तिङ्री एक विशाल मैदानी भाग है, जिसके चारों ओर पहाड़ ही पहाड़ हैं। यहाँ बीच में एक पहाड़ी है,

जिस पर देवालय स्थित है। देवालय को पत्थरों के ढेर, जानवरों के सींगों और रंग-बिरंगे कपड़े की झंडियों से सजाया गया है।

तिब्बत का पौराणिक इतिहास क्या है

प्राचीनकाल में तिब्बत को त्रिविष्टप कहते थे। भारत के बहुत से विद्वान मानते हैं कि तिब्बत ही प्राचीन आर्यों की भूमि है।

पौराणिक ग्रंथों अनुसार वैवस्वत मनु ने जल प्रलय के बाद इसी को अपना निवास स्थान बनाया था और फिर यहीं से उनके कुल के लोग संपूर्ण भारत में फैल गए थे।

वेद-पुराणों में तिब्बत को त्रिविष्टप कहा गया है। महाभारत के महाप्रस्थानिक पर्व में स्वर्गारोहण में स्पष्ट किया गया है कि तिब्बत हिमालय के उस राज्य को पुकारा जाता था

जिसमें नंदनकानन नामक देवराज इंद्र का देश था। इससे सिद्ध होता है कि इंद्र स्वर्ग में नहीं धरती पर ही हिमालय के इलाके में रहते थे।

वहीं शिव और अन्य देवता भी रहते थे। कई माह तक वैवस्वत मनु (इन्हें श्रद्धादेव भी कहा जाता है) द्वारा नाव में ही गुजारने के बाद उनकी नाव गोरी-शंकर के शिखर से होते हुए नीचे उतरी। गोरी-शंकर जिसे एवरेस्ट की चोटी कहा जाता है।

दुनिया में इससे ऊंचा, बर्फ से ढंका हुआ और ठोस पहाड़ दूसरा नहीं है।

तिब्बत में धीरे-धीरे जनसंख्या वृद्धि और वातावरण में तेजी से होते परिवर्तन के कारण वैवस्वत मनु की संतानों ने अलग-अलग भूमि की ओर रुख करना शुरू किया।

इन आर्यों के ही कई गुट अलग-अलग झुंडों में पूरी धरती पर फैल गए और वहां बस कर भांति-भांति के धर्म और संस्कृति आदि को जन्म दिया। मनु की संतानें ही आर्य-अनार्य में बंटकर धरती पर फैल गईं।

त्रिविष्टप अर्थात तिब्बत या देवलोक से वैवस्वत मनु के नेतृत्व में प्रथम पीढ़ी के मानवों (देवों) का मेरु प्रदेश में अवतरण हुआ।

वे देव स्वर्ग से अथवा अम्बर (आकाश) से पवित्र वेद पुस्तक भी साथ लाए थे। इसी से श्रुति और स्मृति की परम्परा चलती रही। वैवस्वत मनु के समय ही भगवान विष्णु का मत्स्य अवतार हुआ।

तिब्बत की प्रसिद्ध पर्यटन स्थल

तिब्बत में पर्यटक आकर्षण काफी हद तक किंघई-तिब्बत पठार पर अलग-अलग ऊंचाई, विविध स्थलाकृति और जलवायु द्वारा आकार और परिभाषित होते हैं।

अधिकांश अंतरराष्ट्रीय और घरेलू पर्यटकों के लिए, तिब्बत यात्रा का सबसे बड़ा आकर्षण व्यक्तिगत रूप से तिब्बती बौद्ध धर्म के आध्यात्मिक क्षेत्र में जीवन का अनुभव करने और अल्पाइन दृश्यों के उदात्त दृश्य का आनंद लेने और तिब्बती लोक संस्कृति के बारे में अधिक से अधिक देखने में सक्षम होगा।

1. सांस्कृतिक मुठभेड़

• नाचू हॉर्स रेसिंग फेस्टिवल
• बरखोर स्ट्रीट
• नोरबुलिंगका
• चिम-पुक हर्मिटेज
• रुतोग रॉक पेंटिंग
• डोनकर और पियांग

2. प्राकृतिक दृश्य स्थल

• एवरेस्ट बेस कैंप
• गामा घाटी
• यारलुंग सांगपो घाटी
• ज़ांडा अर्थ फ़ॉरेस्ट
• लुलंग वन
• ड्रोलमा कैन्यन

3. तिब्बत हॉट स्प्रिंग

• यांगपाचेन हॉट स्प्रिंग
• टिड्रम हॉट स्प्रिंग
• मंगपू हॉट स्प्रिंग
• कांगबू हॉट स्प्रिंग
• वोका हॉट स्प्रिंग
• रिडुओ हॉट स्प्रिंग

4. तिब्बत में ग्लेशियर

• रोंगबुक ग्लेशियर
• पुरोग कांगड़ी ग्लेशियर
• मिडुई ग्लेशियर
• लेगू ग्लेशियर

5. तिब्बती पर्वत

• माउंट एवरेस्ट
• कैलाश पर्वत
• माउंट नामजगबरवा
• माउंट शीशपंगमा
• गंगपो री
• माउंट चो ओयू
• बोनरी पर्वत
• न्येनचेन तांगुला पर्वत

6. महल और किले

• पोटाला पैलेस
• ग्यांत्से ज़ोंग
• युंबुलगांग
• गेज किंगडम
• जियांगक्सियोंग किंगडम
• तिब्बती राजाओं के मकबरे
• पंचेन लामासी का ग्रीष्मकालीन महल

7. तिब्बती झीलें

• नमत्सो झील
• यमद्रोक झील
• मानसरोवर झील
• सिलिंग त्सो
• ड्रैक्सम त्सो
• रणवोक झील
• पैंगोंग झील

8. तिब्बती मठ

• जोखाग मंदिर
• सम्य मंदिर
• गदेन मठ
• देपुंग मठ
• सेरा मठ
• तशीलहुनपु मठ
• शाक्य मठ
• रॉन्गबुक मठ

हमारा अंतिम शब्द

तो दोस्तों आसा करता हु की आपको हमारे दिया गया जानकारी (तिब्बत का क्षेत्रफल कितना है – Tibet ka Kshetrafal Kitna Hai) आपको पसंद आया होगा. अगर आपको पसंद आये तो हमें नीच Comments करके बताये और अपने दोस्तों के साथ और Social Media Platforms पर Share जरूर करे. धन्यवाद!

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