उत्तराखंड की राजधानी क्या है – Uttarakhand ki Rajdhani Kya Hai

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उत्तराखंड की राजधानी क्या है – Uttarakhand ki Rajdhani Kya Hai : नमस्कार दोस्तों, आपको स्वागत है हमारे इस Blog पर, जहापर आज हम आपको बताएँगे “उत्तराखंड की राजधानी क्या है – Uttarakhand ki Rajdhani Kya Hai”। भारत एक विशाल देश है। क्षेत्रफल की दृष्टि से भारत दुनिया का सातवा सबसे बड़ा देश है। भारत के 28 राज्यों और 8 केंद्र शासित प्रदेश है। जिसमें से “उत्तराखंड” भारत के एक राज्य है, जो भारत के उत्तर स्थान में बसा एक राज्य है। उत्तराखंड को भारत का “देबभूमि” कहा जाता है तथा उत्तराखंड प्रदेश एक ‘बर्फीले पहाड़ो’ का प्रदेश है। उत्तराखंड प्रदेश में पहाड़ों और जंगल विरासत, संस्कृति, तथा प्राकृतिक सौंदर्य का अनूठा संगम है। क्या आप जानते है की — उत्तराखंड की राजधानी क्या है – Uttarakhand ki Rajdhani Kya Hai.

उत्तराखंड राज्य की स्थापना 9 नवंबर 2000 को स्थापित की गई थी। इससे पहले उत्तराखंड उत्तर प्रदेश राज्य में शामिल था। उत्तराखंड को पहले उत्तराँचल नाम से जाना जाता था। 1 जनवरी 2007 को इसका नाम बदल कर उत्तराखंड कर दिया गया। उत्तराखंड के पूर्व में नेपाल , पश्चिम हिमाचल , उत्तर में तिब्बत और दक्षिण में उत्तर प्रदेश स्थित हैं। तो चलिए जानते है — उत्तराखंड की राजधानी क्या है – Uttarakhand ki Rajdhani Kya Hai.

उत्तराखंड की राजधानी क्या है – Uttarakhand ki Rajdhani Kya Hai

उत्तराखंड की राजधानी क्या है

भारत देश के एक से अधिक राजधानियों वाले राज्यों में शामिल होने वाला उत्तराखंड पांचवा राज्य है। इस राज्य की दो राजधानियां है, शीतकालीन राजधानी देहरादून एवं ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैण है। उत्तराखंड राज्य का गठन 9 नवंबर 2000 को भारत के 27 वे राज्य के रूप में हुआ था, पहले यह उत्तरांचल के नाम से जाना जाता था जिसे बाद में बदलकर उत्तराखंड किया गया। राज्य के गठन के समय से उत्तराखंड की अंतरिम राजधानी बनाया गया था।

उत्तराखंड की दो राजधानी हैं —

• शीतकालीन राजधानी — देहरादून।
• ग्रीष्मकालीन राजधानी — गैरसैंण।

वर्तमान में उत्तराखंड को देवभूमि देवों की भूमि के नाम से भी जाना जाता हैं, क्योंकि यहाँ पर हिन्दू देवी – देवताओं के कई सारे मंदिर स्थित हैं। उत्तराखंड राज्य को दो हिस्से गढ़वाल और कुमाऊं मंडल में बांटा गया है।

देहरादून उत्तराखंड की राजधानी होने के साथ-साथ राज्य का सबसे बड़ा शहर भी है। देहरादून दो शब्दों से मिलकर बना है डेरा और डन। डेरा का अर्थ होता है शिविर और डन का अर्थ होता है घाटी। देहरादून हिमालय की तलहटी में स्थित है जिसके पूर्व दिशा में गंगा नदी और पश्चिम दिशा में यमुना नदी बहती है।

उत्तराखण्ड की राजधानी देहरादून का संबंध महाभारत काल से जुड़ा है। महाकाव्य में देहरादून शहर का नाम द्रोणनगरी के नाम पर आधारित है। द्रोणनगरी का मतलब श्री गुरु द्रोणाचार्य की नगरी है। द्रोणाचार्य पांडवों और कोरवों के गुरु थे। त्रेतायुग में लंका से वापसी के समय भगवान राम और लक्ष्मण का आगमन यही पर हुआ था। आज भी लक्ष्मण सिद्ध मंदिर उत्तराखण्ड की राजधानी देरहादून में स्थित है, यहाँ पर लक्ष्मण जी ने प्रभु का ध्यान किया था।

उत्तराखंड की शीतकालीन राजधानी — देहरादून (Dehradun)

उत्तराखंड की शीतकालीन राजधानी — देहरादून (Dehradun) है। देहरादून देश की राजधानी दिल्ली से यह 230 किलोमीटर की दूरी पर। इसकी स्थापना 1676 में हुई थी। उत्तराखंड राज्य में दून घाटी के बीच स्थित देहरादून भारत के दर्शनीय स्थलों में से एक हैं। उतराखण्ड राज्य की राजधानी देहरादून पर्यटकों के मध्य बहुत ही लोकप्रिय हिल स्टेशन है, जो फैमली वेकेशन, फ्रेंड्स टूर और कपल्स के घूमने के लिए उत्तराखंड की परफेक्ट हॉलिडे डेस्टिनेशन है। उतराखण्ड राज्य में गढ़वाल हिमालय की एक सुंदर पृष्ठभूमि पर स्थित देहरादून समुद्र तल से 1400 फीट की ऊंचाई पर स्थित है। भारत के दर्शनीय स्थल देहरादून के नजदीक एक और अन्य पर्यटक स्थल मसूरी भी हैं जो पर्यटकों को बहुत अधिक आकर्षित करता हैं।

एक नजर में उत्तराखंड की राजधानी – देहरादून

• स्थान — देहरादून (Dehradun)
• देश — भारत
• राज्य — उत्तराखंड ( देहरादून इसकी शीतकालीन राजधानी)
• स्थापना — 1676
• नगरपालिका का स्थापना — 1767
• क्षेत्रफल — 300 बर्गकिमी (100 बर्गमिल)
• ऊंचाई — 447 मीटर (1,467 फिट)
• तहसील — 6
• जनसंख्या — नगर : 578420, महानगर : 714223
• जनसंख्या की घनत्व — 1,900 / बर्गकिमी (5,000 / वर्गमील)
• भाषाएँ — आधिकारिक : हिन्दी, क्षेत्रीय : गढ़वाली, अंग्रेजी, अतिरिक्ति आधिकारिक : संस्कृत
• सरकार — मेयर कॉउन्सिल
• नगरपालिका — देहरादून नगर निगम
• महापौर — सुनील उनियाल (भाजपा)
• म्युनिसिपल कमिश्नर — विनय शंकर पाण्डे (IAS)
• वेबसाइट — nagarnigamdehradun.in
• dehradun.nic.in//

उत्तराखंड की राजधानी देहरादून की भौगोलिक स्थिति क्या है

देहरादून जिला उत्तर में हिमालय से तथा दक्षिण में शिवालिक पहाड़ियों से घिरा हुआ है। इसमें कुछ पहाड़ी नगर अत्यन्त प्रसिद्ध है जैसे मसूरी, सहस्रधारा, चकराता,लाखामंडल तथा डाकपत्थर। पूर्व में गंगा नदी और पश्चिम में यमुना नदी प्राकृतिक सीमा बनाती है। यह जिला दो प्रमुख भागों में बंटा है जिसमें मुख्य शहर देहरादून एक खुली घाटी है जो कि शिवालिक तथा हिमालय से घिरी हुई है और दूसरे भाग में जौनसार बावर है जो हिमालय के पहाड़ी भाग में स्थित है। यह उत्तर और उत्तर पश्चिम में उत्तरकाशी जिले, पूर्व में टिहरी और पौड़ी जिले से घिरा हुआ है। इसकी पश्चिमी सीमा पर हिमांचल प्रदेश का सिरमौर जिला तथा टोंस और यमुना नदियाँ हैं तथा दक्षिण में हरिद्वार जिले और उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले इसकी सीमा बनाते हैं।

देहरादून 29 डिग्री 58′ और 31 डिग्री 2′ 20″ उत्तरी अक्षांश तथा 77 डिग्री 34′ 45″ और 78 डिग्री 18′ 30″ पूर्व देशांतर के बीच स्थित है। इस जिले में (देहरादून, चकराता, विकासनगर, कलसी, त्यूनी तथा ऋषिकेश) 6 तहसीलें, विज़, चकराता, कलसी, विकासनगर, सहासपुर, राजपुर और डोइवाला नाम के 6 सामुदायिक विकास खंड, 17 नगर और 764 गाँव हैं। इनमें से 746 गाँवों में लोग निवास करते हैं जबकि 18 जिले निर्जन हैं।

देहरादून की क्षेत्रफल कितनी है

क्षेत्रफल एवं जनसंख्या में देहरादून नगर 300 वर्ग किलोमीटर यानी 100 वर्ग मील के क्षेत्र में फैला हुआ है समुद्र तल से इसकी ऊंचाई 447 मीटर यानी लगभग 1467 फीट के जितनी है।

देहरादून की जनसंख्या कितनी है

वर्ष 2011 में हुई जनसंख्या जनगणना के अनुसार इसकी नगरीय जनसंख्या 578420 एवं पूरे महानगर की जनसंख्या 14223 के करीब की दर्ज की गई थी। जनसंख्या घनत्व में 1900 व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर है। ग्रामीण क्षेत्र की जनसंख्या 601965 और नगरीय जनसंख्या मात्र 677118 है। जनपद में साक्षरता 78.5 प्रतिशत है, पुरुषों की साक्षरता 84.87 तथा महिला साक्षरता 71.20 प्रतिशत है। आधिकारिक भाषा हिंदी के अलावा क्षेत्रीय भाषा गढ़वाली एवं अंग्रेजी का भी इस्तेमाल होता है।

देहरादून की प्रसिद्ध दर्शनीय पर्यटन स्थल

हिमालय की तलहटी में बसा देहरादून एक आरामदेह जगह है जहाँ साल के किसी भी समय जाया जा सकता है। देहरादून घूमने के लिए एक आदर्श मौसम गर्मी का मौसम होता है जब मौसम सुहावना होता है। यह मानसून और शरद ऋतु के मौसम के दौरान भी देखने लायक है।

• रॉबर्स गुफा (Robber’s Cave)
• टपकेश्वर मंदिर (Tapkeshwar Temple)
• सहस्त्रधारा (Sahastradhara)
• माइंड्रोलिंग मठ (Mindrolling Monastery)
• मालसी डियर पार्क (Malsi Deer Park)
• राजाजी राष्ट्रीय उद्यान (Rajaji National Park)
• फन वैली (Fun Valley)
• वन अनुसंधान संस्थान (Forest Research Institute)
• हर की दून (Har Ki Dun)

इतिहास का इतिहास – History of Dehradun in Hindi

देहरादून का इतिहास रामायण और महाभारत की कहानी से जुड़ा है। ऐसा माना जाता है कि रावण और भगवान राम के बीच युद्ध के बाद, भगवान राम और उनके भाई लक्ष्मण ने इस स्थल का दौरा किया था। इसके अलावा, महाभारत में कौरवों और पांडवों के महान शाही गुरु, द्रोणाचार्य के नाम पर ‘द्रोणनगरी’ के रूप में जाना जाता है। माना जाता है कि उनका जन्म और निवास देहरादून में हुआ था।

देहरादून के आसपास के क्षेत्रों में प्राचीन मंदिरों और मूर्तियों जैसे साक्ष्य मिले हैं जिन्हें रामायण और महाभारत की पौराणिक कथाओं से जोड़ा गया है। ये अवशेष और खंडहर लगभग 2000 साल पुराने माने जाते हैं। इसके अलावा, स्थान, स्थानीय परंपराएं और साहित्य महाभारत और रामायण की घटनाओं के साथ इस क्षेत्र के संबंधों को दर्शाते हैं।

महाभारत की लड़ाई के बाद भी, इस क्षेत्र पर पांडवों का प्रभाव था क्योंकि हस्तिनापुर के शासकों ने सुबाहू के वंशजों के साथ इस क्षेत्र पर सहायक के रूप में शासन किया था। इसी तरह, इतिहास के पन्नों में ऋषिकेश का उल्लेख है जब भगवान विष्णु ने संतों की प्रार्थना का जवाब दिया, राक्षसों का वध किया और संतों को भूमि सौंप दी। महाभारत के समय में चकराता नामक स्थान का ऐतिहासिक प्रभाव है।

मुगल बादशाह औरंगजेब करिश्माई राम राय की चमत्कारी शक्तियों से अत्यधिक प्रभावित थे। उन्होंने गढ़वाल के समकालीन महाराजा फतेह शाह से राम राय को हर संभव मदद देने के लिए कहा। प्रारंभ में, धमावाला में एक गुरुद्वारा मंदिर बनाया गया था।

वर्तमान भवन, गुरु राम राय दरबार साहिब का निर्माण 1707 में पूरा हुआ था। दीवारों पर देवी-देवताओं, संतों और धार्मिक कहानियों के चित्र हैं। फूलों और पत्तियों, जानवरों और पक्षियों, पेड़ों और मेहराबों पर बड़ी-बड़ी आँखों के चित्र हैं जो कांगड़ा-गुलेर कला और मुगल कला की रंग योजना के प्रतीक हैं।

ऊंची मीनारें और गोल शिखर मुस्लिम वास्तुकला के नमूने हैं। मदिर के सामने 80 फीट का विशाल तालाब वर्षों से पानी की कमी के कारण सूख गया था। लोग कूड़ा फेंक रहे थे। इसे पुनर्निर्मित और पुनर्जीवित किया गया है।

यह अफगानिस्तान के अंतिम राजा मोहम्मद नादिर शाह का जन्मस्थान था। दो विचित्र महल – देहरादून में काबुल पैलेस और मसूरी में बाला हिसार पैलेस – अफगानिस्तान के साथ इस संबंध की गवाही देते हैं। वे इन अफगान शासकों द्वारा 20 वीं शताब्दी के शुरुआती भाग में भारत में निर्वासन में बनाए गए थे।

उत्तराखंड की ग्रीष्मकालीन राजधानी — गैरसैण (Gairsain)

गैरसैंण (Gairsain) भारत के उत्तराखंड राज्य की ग्रीष्मकालीन राजधानी है। उत्तराखंड के चमोली जिले में स्थित एक शहर है। इसकी स्थिति पूरे उत्तराखंड राज्य के मध्य में है। उत्तराखंड के राज्य के रूप में गठन होने के बाद से ही गैरसैंण को यहां की राजधानी घोषित करने की मांग उठने लगी थी। गढ़वाल व कुमाऊँ मण्डलों के बाद इसे तीसरे मण्डल का दर्जा 05 मार्च , 2021 को दिया गया हैं।

एक नजर में उत्तराखंड की राजधानी – गैरसैंण

• स्थान — गैरसैंण (Gairsain)
• देश — भारत
• राज्य — उत्तराखंड (गैरसैण इसकी ग्रीष्मकालीन राजधानी)
• स्थापना — 4 मार्च 2020
• जिला — चमोली
• क्षेत्रफल — 7.53 बर्गकिमी
• ऊंचाई — 1,750 मीटर (5,741 फिट)
• जनसंख्या — 7,138 (2011)
• जनसंख्या की घनत्व — 947.94 प्रति वर्ग किमी
• भाषाएं — आधिकारिक : हिंदी, इंग्लिश, क्षेत्रीय : गढ़वाली तथा कुमांऊॅंनी

गैरसैण का भौगोलिक स्थिति कैसे है

गैरसैंण समुद्र सतह से लगभग 5750 फुट की ऊँचाई पर स्थित मैदानी तथा प्रकृति का सुन्दरतम भू-भाग है। यह समूचे उत्तराखण्ड के बीचों-बीच तथा सुविधा सम्पन्न क्षेत्र माना जाता है। उत्तराखण्ड राज्य के मध्य में होने के कारण बर्षों से चले आ रहे पृथक उत्तराखण्ड राज्य की स्थाई राजधानी के रूप में सर्वमान्य स्वीकार किया जाता रहा है। भौगोलिक दृष्टि से यहॉं की जलवायु को तरगर्म माना जाता है। गैरसैंण का उत्तराखण्ड राज्य के कुमांऊँ, गढ़वाल तथा मैदानी भूभागों के बीचों-बीच स्थित होना इसका मुख्य बिन्दु व बिषय है, जो पर्वतीय क्षेत्रों के विकास लिये नितान्त आवश्यक भी है।

गैरसैण की क्षेत्रफल क्या है

उत्तराखंड का गैरसैंण नगर 7.53 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में फैला हुआ है। समुद्र तल से इसकी ऊंचाई 1750 मीटर यानी लगभग 5741 फीट के जितनी है।

गैरसैण की जनसंख्या कितनी है

वर्ष 2011 में हुई जनसंख्या जनगणना के अनुसार यहां की कुल जनसंख्या 7138 दर्ज की गई थी, जिसमें महिलाओं एवं पुरुषों की संख्या क्रमशः 3556 एवं 3583 दर्ज की गई थी। कुल जनसंख्या का औसतन 87.27 परसेंट लोग साक्षर दर्ज किए गए थे। लिंगानुपात में प्रति हजार पुरुष 862 महिलाएं है।

गैरसैंण नाम का उद्भव कहाँ हुआ

गैरसैंण नाम का शब्द स्थानीय बोली के शब्दों से मिलकर बना है। “गैर” तथा “सैंण”। गैर गढ़वाली भाषा में गहरे स्थान को कहते हैं तथा सैंण नामक शब्द मैदानी भू-भाग का पर्याय है। जिसका अर्थ स्पष्टत: गैर + सैंण = गैरसैंण है, यानि “गहरे में समतल मैदान”। (जैसे गैरसैंण के समीपवर्ती भिकियासैंण, चिन्यालीसैंण, थैलीसैंण, भराड़ीसैंण इत्यादि कुमांऊँ व गढ़वाल के दोसॉंद यानि दो सीमाओं का सीमावर्ती भूभाग) दूसरा अब कुछ लोग गैरसैंण को इस प्रकार भी परिभाषित करने लगे हैं कि यह समीपवर्ती गैड़ नामक गॉंव के नीचे स्थित है, जिस कारण यह गैरसैंण कहलाता है। परन्तु यह तथ्य सटीक होने में संदेहात्मक प्रतीत होता है।

गैरसैण की प्रसिद्ध दर्शनीय पर्यटन स्थल

गैरसैण एक उभरता हुआ पर्यटन स्थल है, जो भारत के उत्तराखंड राज्य में स्थित है। विवादास्पद शहर गढ़वाल और कुमाऊं क्षेत्रों की सीमाओं के बीच समुद्र तल से 1650 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। यह भविष्य में उत्तराखंड की राजधानी के रूप में एक लोकप्रिय शहर है। इस शहर से कनेक्टिविटी अच्छी तरह से स्थापित है और कुमाऊं और गढ़वाल जिलों तक पहुंच अक्सर उपलब्ध है। यह प्रकृति के अजूबों से भरा एक छोटा सा शहर है और उत्तराखंड के व्यावसायिक केंद्रों में से एक बन गया है। यह आगंतुकों और यात्रियों के लिए एक गुणवत्तापूर्ण छुट्टी का आश्वासन देता है और छुट्टी की भावना को काफी ऊंचा रखता है।

यहाँ के प्रसिद्ध स्थल —

• बृद्ध बद्री
• जोग ध्यान बद्री
• आदि बद्री

उत्तराखंड का इतिहास – History of Uttarakhand in Hindi

उत्तराखंड राज्य के दो संभाग गढ़वाल और कुमाऊं हैं। चंद राजवंश का शासनकाल कमाऊन के क्षेत्र पर और परमार राजवंशो का शासनकाल गढ़वाल के क्षेत्र पर था। सन 1790 में गोरखाओं ने हमला करके दोनो संभाग को अपने आधीन कर लिया। सन 1815 के दौरान राजा सुदर्शन शाह ने टिहरी और उत्तरकाशी पर अपना कब्जा जमा लिया था। 1815 के बाद गढ़वाल और कुमाऊं ब्रिटिस शासन के आधीन हो गया था।

सन 1947 में भारत की आजादी के बाद गढ़वाल और कुमाऊं का क्षेत्र उत्तर प्रदेश राज्य का हिस्सा था। 9 नवम्बर 2000 को उत्तर प्रदेश राज्य का एक हिस्सा अलग करके एक नया राज्य उत्तरांचल बनाया गया। इसके बाद 1 जनवरी 2007 को उत्तरांचल नाम को बदलकर उत्तराखण्ड राज्य कर कर दिया गया।

उत्तराखंड का नाम संस्कृत भाषा के उत्तरा शब्द से लिया गया है जिसका अर्थ होता है उत्तर, और खाड़ा का अर्थ होता भूमि। अर्थात उत्तरी भूमि।हिंदू धर्म में दो पवित्र नदियाँ गंगा और यमुना का उद्गम उत्तराखंड के ग्लेशियर से हुआ है। इसके अलावा जो हिंदुओं के लिए चार धाम पवित्र तीर्थ है जिनमे से दो स्थल बद्रीनाथ और केदारनाथ उत्तराखंड की धरती पर स्थित है।

FAQs

गैरेसण को उत्तराखंड की ग्रीष्मकालीन राजधानी कब घोषित किया गया?
गैरेसण को उत्तराखंड की ग्रीष्मकालीन राजधानी 8 जून 2020 को घोषित किया गया।

उत्तराखंड का पुराना नाम क्या था?
उत्तराखंड का पुराना नाम उत्तरांचल था 21 दिसंबर 2006 को इसका नाम उत्तराखंड हुआ।

उत्तराखंड राज्य की स्थापना कब हुई?
उत्तराखंड राज्य की स्थापना 9 नवंबर 2000 को हुई।

उत्तराखंड की राजधानी कहा है?
उत्तराखंड की दो राजधानिया है। उत्तराखंड की शीतकालीन राजधानी देहरादून है और ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण है।

उत्तराखंड की शीतकालीन राजधानी क्या है?
उत्तराखंड की शीतकालीन राजधानी देहरादून है।

उत्तराखंड की ग्रीष्मकालीन राजधानी क्या है?
उत्तराखंड की ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण है।

उत्तराखंड का क्षेत्रफल कितना है?
उत्तराखंड का क्षेत्रफल 53483 वर्ग किलोमीटर है।

उत्तराखंड की जनसँख्या कितनी है?
2011 के जनगणना के आधार पर उत्तराखंड की जनसँख्या 36.6 लाख है।

हमारा अंतिम शब्द

तो दोस्तों आसा करता हु की आपको हमारे दिया गया जानकारी (उत्तराखंड की राजधानी क्या है – Uttarakhand ki Rajdhani Kya Hai) आपको पसंद आया होगा. अगर आपको पसंद आये तो हमें नीच Comments करके बताये और अपने दोस्तों के साथ और Social Media Platforms पर Share जरूर करे. धन्यवाद!

3 COMMENTS

  1. आपने बहुत अच्छी जानकारी साँझा की है। वाकई में मुझे अप्पके ब्लॉग से बहुत कुछ सिखने को मिलता है।

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